खाते से पैसा कटने के बाद भी फेल हुआ UPI या IMPS! ऐसे मिलेगा पैसा वापस

MANTRA DEVICE PROBLEM

  यदि आपकी मंत्रा डिवाइस खराब हो  क्या करना पड़ेगा इस विषय में हम  बात करेंगे | 




  • सबसे पहले आप अपने किसी दूसरे मोबाइल और PC में अपनी डिवाइस को चेक करे | ऐसा  है की आपकी डिवाइस सही हो पर आपका मोबाइल या PC में कोई दिक्कत हो सकती है | 

  • आप अपना OTG केबल  एक बार चेक कर ले | 

  • आप अपनी डिवाइस का केबल  बार चेक कर ले वो भी ख़राब हो जाती है | 



  • इसके बाद आप मंत्रा कस्टमर से संपर्क करे | जिससे आप अपनी समस्या बताकर उसका समाधान कर सकते है | 



  • वो आपको RMA से भी ठीक हो सकती है पर यदि उसमे कोई हार्डवेयर की दिक्कत है तो आपको अपना डिवाइस सर्विस सेंटर में भेजना पड़ेगा | 


  • आप अपने डिवाइस को पोस्ट भी कर सकते है | 

  •  इसमें आपको अपनी डिवाइस भेजने के बाद  14 दिन भी लग सकते है  | 

  • आपको सारी जानकारी ईमेल के माध्यम से मिलती रहेगी | 

  • आप अपना RMA नंबर से अपनी डिवाइस का स्टेटस भी चेक कर सकते है | 



Telephone Number : 079-49068000 ; Support Phone : 079-49068000 ; Sales Phone : 079-49068001 ; International Phone : +917949068001 ...

PAYMENT FAIL PROBLEM

 यदि हमारे किसी भाई के गूगल पे ( तेज ) में पैसे फस जाये तो किया करे 

यदि हमारे किसी भाई के गूगल पे ( तेज ) में पैसे फस जाते तो आपको घबराना नहीं है क्योंकि ये पैसा आपका सैफ रहता है आपको बिलकुल भी भाबराने की जरुरत नहीं है | 






पैसा फसने का कारण क्या हो सकता है - 

  • आपके इंटरनेट की स्पीड मंदी हो | 
  •  आपका एकदम से कॉल आ जाये जिससे आपका नेट बंद हो जाये | 
  • सर्वर में दिक्कत आ जाये | 
  • बैंक के सर्वर डाउन हो | 
  • आपका पिन गलत लग जाए
  • रिसीवर के बैंक के सर्वर डाउन हो तब भी आपका पेमेंट फस सकता है | 
पैसा फसने पर क्या करे - 
  • यदि आपका पेमेंट फ़ैल हो जाता है तो पैसा वापस आ जायेगा | 
  •  सबसे पहले आप कस्टमर केयर को कॉल करके कम्पलैंड करे | कस्टमर केयर नम्बर  18004190157
  • आपको तीन दिन का इंतजार करना पड़ेगा | आपका पैसा रिफंड आ जायेगा | यदि पैसा वापस नहीं आया तो आपको पॉइंट दो को फॉलो करे | 
  • यदि पेमेंट पेंडिंग में है तो आप उसे देखते रहे जैसे ही पेमेंट सफल हो जाता है तो आप पैसा पेयर को चला गया | 
  • उसके बाद आप गूगल पे को ईमेल भी कर सकते है | जिससे आपकी मदद हो सकती है | 

Google Pay India के ग्राहक सेवा टीम से संपर्क करने का तरीका

Google Pay (पहले इसका नाम Tez था) का इस्तेमाल करते समय, अगर आपको समस्याएं आती हैं, तो हम आपकी मदद के लिए तैयार हैं.

Google Pay India के ग्राहक सेवा नंबर पर कॉल करना

हमारे ग्राहक सेवा केंद्र को इस टोल फ़्री नंबर पर कॉल किया जा सकता है: 1-800-419-0157.

किसी लेन-देन या इनाम से जुड़ी मदद पाने के लिए

  1. Google Pay ऐप्लिकेशन  खोलें.
  2. 'लेन-देन का इतिहास दिखाएं' पर टैप करें.
  3. कोई लेन-देन चुनें.
  4. सबसे नीचे, क्या कोई समस्या आ रही है? चुनें
  5. स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करें और कोई विकल्प चुनें.

अगर आपको पैसे चुकाने का तरीका जोड़ने में कोई मदद चाहिए, तो बैंक खाता जोड़ने में आने वाली समस्याएं ठीक करना लेख में बताया गया तरीका आज़माएं.

हमारे सहायता केंद्र पर जाना

  1. Google Pay सहायता केंद्र खोलें.
  2. होम पेज पर लेखों की सूची में अपनी समस्या ढूंढें.
  3. अपनी समस्या के मुताबिक विषय चुनें.

संदिग्ध गतिविधि की शिकायत करना

अगर आपको लगता है कि Google Pay पर आपके Google खाते का गलत इस्तेमाल किया गया है, जैसे कि संदिग्ध लेन-देन या आपकी अनुमति के बिना लगाए गए शुल्क,  तो ऊपर बताए गए विकल्पों के ज़रिए हमारी ग्राहक सहायता टीम से संपर्क करें.

FROUD SE SAVDHAN

फर्जी वेबसाइट से रहें सावधान, नहीं तो खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंट, इन बातों का रखें ध्यान


बैंक फ्रॉड करने के लिए एक तरीका स्पूफिंग (Spoofing) का भी है. इसमें अपराधी फर्जी वेबसाइट बनाते हैं. और लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं|

फर्जी वेबसाइट से रहें सावधान, नहीं तो खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंट, इन बातों का रखें ध्यान
बैंक फ्रॉड करने के लिए एक तरीका स्पूफिंग (Spoofing) का भी है.

कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) के दौर में लोग अपना ज्यादातर समय स्मार्टफोन या लैपटॉप पर बिताते हैं. ज्यादातर लोग अपना बैंक (Bank) से जुड़ा कामकाज भी ऑनलाइन ही करते हैं. ऐसे में साइबर अपराधी भी इसका फायदा उठा रहे हैं. देश में साइबर अपराध (Cyber Crime) और बैंक फ्रॉड (Bank Fraud) के मामले तेजी के साथ बढ़ रहे हैं. अपराधी लोगों को अपने झांसे में फंसाकर कुछ मिनटों में उनका बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं. अपराधी लोगों के साथ बैंक फ्रॉड करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. इनमें से एक तरीका स्पूफिंग (Spoofing) का भी है. इसमें अपराधी फर्जी वेबसाइट बनाते हैं. और लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं.

स्पूफिंग क्या है?

वेबसाइट स्पूफिंग में एक फर्जी वेबसाइट बनाई जाती है, जिसका मकसद फ्रॉड करना होता है. फर्जी वेबसाइट को असली दिखाने के लिए, अपराधी असल वेबसाइट के नाम, लोगो, ग्राफिक्स और उसके कोड का भी इस्तेमाल करते हैं. वे आपकी ब्राउजर विन्डो के टॉप पर एड्रेस फील्ड में दिखने वाले यूआरएल की भी नकल कर लेते हैं. असके साथ नीचे दायीं तरफ दिए पैडलॉक आइकन की भी नकल करते हैं.

इस फ्रॉड को कैसे किया जाता है?

अपराधी फर्जी वेबसाइट का लिंक आपको ईमेल के जरिए भेजते हैं, जिसमें आपको अकाउंट से संबंधित जानकारी को अपडेट या कन्फर्म करने के लिए कहा जाता है. इसके जरिए मकसद अकाउंट से संबंधित संवेदनशील जानकारी को चुराना होता है. इसमें आपकी इंटरनेट बैंकिंग यूजर आईडी, पासवर्ड, पिन, क्रेडिट/ डेबिट कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर, कार्ड वेरिफिकेशन वैल्यू (CVV) नंबर आदि शामिल होता है.

इन सेफ्टी टिप्स को करें फॉलो

  1. इस बात का ध्यान रखें कि बैंक कभी भी आपसे गोपनीय जानकारी को पूछने के लिए ईमेल नहीं भेजता है. अगर आपको ईमेल मिलता है, जिसमें आपसे आपकी इंटरनेट बैंकिंग सिक्योरिटी डिटेल्स जैसे पिन, पासवर्ड या अकाउंट नंबर मांगा जाता है, तो आपको जवाब नहीं देना चाहिए.
  2. इसके अलावा ब्राउजर के विन्डो में कहीं पैडलॉक आइकन दिया जाता है. उदाहरण के लिए, माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सपलोरर में ब्राउजर विन्डो में नीचे दायीं तरफ लॉक आइकन मौजूद होता है. अपने वेब ब्राउजर में इस पर क्लिक या डबल क्लिक करके आप वेबसाइट की सिक्योरिटी की डिटेल्स को देख सकते हैं.
  3. यह चेक करना महत्वपूर्ण है कि सर्टिफिकेट किसके नाम पर जारी किया गया है, क्योंकि कुछ फर्जी वेबसाइट्स में ब्राउजर के पैडलॉक आइकन से मिलता-जुलता पैडलॉक आइकन हो सकता है.
  4. इसके साथ वेब में ब्राउजिंग करते समय, URL “http” के साथ शुरू होता है. हालांकि, एक सुरक्षित कनेक्शन पर, एड्रेस “https” के साथ शुरू होना चाहिए. इसमें आखिर में दिए गए “s” का ध्यान रखें.

Cash on Delivery Fraud: सावधान! कहीं आपके घर भी तो नहीं आया बिना ऑर्डर के कूरियर, भूलकर भी न करें ये गलती

Cyber Fraud: साइबर क्रिमिनल्स लगातार फर्जीवाड़े के तरीके बदल रहे हैं. अब एक नया तरीका कैश ऑन डिलिवरी का आया है, जिसमें सामने वाले को कहीं से पता ही नहीं चलता कि वह ठगों के जाल में फंस रहा है. इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं. आइए जानते हैं क्या है ये तरीका.

Cash on Delivery Fraud: सावधान! कहीं आपके घर भी तो नहीं आया बिना ऑर्डर के कूरियर, भूलकर भी न करें ये गलती

Cyber Fraud New Trick: साइबर ठगी से जुड़ी कई खबरों को पढ़ने के बाद अगर आप ये सोचते हैं कि आप सेफ हैं तो इस खबर को जरूर पढ़ें, क्योंकि खुद को सुरक्षित समझने की गलती आप पर भारी पड़ सकती है. दरअसल, लोगों के जागरूक होने की वजह से क्रिमिनल्स भी फर्जीवाड़े के तरीके बदल रहे हैं. इसी कड़ी में एक नया तरीका डिलिवरी का आया है, जिसमें सामने वाले को कहीं से पता ही नहीं चलता कि वह ठगों के जाल में फंस रहा है. इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं. यहां हम आपको फ्रॉड की इस तरीके के बारे में विस्तार से बताएंगे. साथ ही आपको देंगे टिप्स कि आप कैसे इस तरह की ठगी से बच सकते हैं.

अब इन नए तरीकों से हो रही ठगी

1. डिलिवरी कैंसिल कराने के नाम पर

रिपोर्ट के मुताबिक, नजफगढ़ में रहने वाले पंकज सिंह के पास कुछ दिन पहले एक कॉल आई. कॉल करने वाले ने बताया कि सर मैं पार्सल लेकर आपके घर के बाहर खड़ा हूं. पंकज ने कोई भी ऑनलाइन शॉपिंग नहीं की थी, लेकिन मामला जानने के लिए वह नीचे गए. डिलिवरी बॉय से पूछा तो उसने कहा कि आपने कैश ऑन डिलिवरी में कुछ बुक किया था. आपको इस ऑर्डर के लिए पैसा देना होगा. पंकज ने साफ इनकार कर दिया कि मैंने ऐसा कोई ऑर्डर नहीं किया है, इसे आप कैंसिल करो. डिलिवरी बॉय ने नाटक करते हुए कस्‍टमर केयर को फोन लगाया और फिर पंकज की बात कराई. बातचीत के दौरान कॉल पर मैजूद शख्स ने पंकज से कहा कि ऑर्डर कैंसिल हो जाएगा, लेकिन इस प्रोसेस के लिए आपको मोबाइल पर आया ओटीपी बताना होगा. पंकज उनकी बातों में आ गए और कॉल पर रहते हुए उस शख्स को ओटीपी बता दिया. इसके बाद उसने कहा कि आपका ऑर्डर कैंसिल हो गया है. डिलिवरी बॉय भी वहां से चला गया. पंकज वापस अपने कमरे में आए, लेकिन इसी दौरान उनके मोबाइल पर बैंक से मैसेज आया, जिसमें खाते में मौजूद सारे पैसे निकलने की बात थी. मैसेज देखकर उनके होश उड़ गए. कुछ देर बाद उन्हें पता चला कि वह डिलिवरी के नाम पर ठगी के शिकार हो चुके हैं.

2. पेंडिंग EMI के लिए पुलिस अफसर बनकर

ठग अब पुलिस अफसर बनकर पेंडिंग ईएमआई के लिए कस्टमर को कॉल करते हैं और उनसे ठगी करते हैं. पिछले दिनों ही दिल्‍ली के पालम विहार थाने का एसएचओ बनकर ठगों ने एक शख्स को कॉल किया और कहा कि आपकी कोई ईएमआई पेंडिंग है. इसकी शिकायत कंपनी की तरफ से हमारे पास आई है. अपनी ईएमआई का भुगतान फौरन करो, नहीं तो हम केस दर्ज करेंगे. इसके बाद उस फर्जी एसएचओ ने उस व्यक्ति को एक नंबर दिया औऱ कहा कि ये वकील है इससे बात कर लो. उन्होंने जब उस नंबर पर कॉल किया तो सामने वाले ने खुद को वकील बताते हुए पैसे ट्रांसफर करा लिए.

इन बातों का रखें ध्यान

  • अगर कोई आपके पास सामान लेकर आए और कहे कि आपने बुक कराया है तो उससे उसका सबूत मांगें, साथ ही अपनी तरफ से भी सबूत दिखा दें कि आपने कोई ऑर्डर नहीं किया है. प्रमुख शॉपिंग वेबसाइट या ऐप के पेज पर जाकर दिखा सकते हैं कि आपने कोई ऑर्डर नहीं किया.

  • अगर आपके घर में किसी ने गलती से ऑर्डर कर भी दिया है और आप उस सामान को नहीं लेना चाहते हैं तो आपको उसे कैंसिल करने के लिए कुछ नहीं करना. आप अगर उस पैकेट को रिसिव नहीं करेंगे तो वह खुद ही वापस चला जाएगा और कैंसिल हो जाएगा.

  • कोई भी ऑर्डर कैंसिल कराने के लिए आए ओटीपी को न बताएं.

  • बात चाहे ऑर्डर कैंसल की हो या दूसरी हो, कॉल पर रहते हुए कोई भी ओटीपी से जुड़ा मैसेज आए तो उसे ध्यान से पढ़ें. दरअसल, ठग अक्सर कॉल पर रहते हुए ध्यान भटकाते हैं और आप फौरन ओटीपी बता देते हैं.

  • अगर लोन या ईएमआई पेंडिंग को लेकर कोई ऐसी कॉल आए जिसमें सामने वाला खुद को पुलिस अफसर बताए तो पहले उस नंबर को वेरिफाई करें. आप लोकल थाने में कॉल करके भी नंबर वेरिफाई कर सकते हैं.

  • इसके अलावा इस तरह की धमकी भरे कॉल से न डरें. पुलिस को इस तरह के मामलों में सीधे कार्रवाई का अधिकार नहीं होता. बैंक के पास सिर्फ कोर्ट का विकल्प बचता है, उसमें भी आपको भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है.

Online Fraud: अकाउंट से चोरी करने वाले ऐप्स से सावधान, मेहनत की कमाई बचाने के लिए करें ये 5 उपाय

Online banking fraud: ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में तेजी से उछाल आया है. बैंकिंग फ्रॉड से बचने के लिए एक्सिस बैंक ने 5 टिप्स दिए हैं. किसी भी सूरत में ‘AnyDesk’ ऐप को डाउनलोड नहीं करें. इससे आपका बैंक अकाउंट खाली हो जाएगा.

 क्लास-10 अध्याय-13 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव


विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज सन् 1820 में वैज्ञानिक हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड ने की । इन्होंने ने अकस्मात् ही देखा कि धातु के चालक से विद्युत धारा प्रवाहित कराने पर दिक्सूचक सुई विक्षेपित होती है । इन्हीं के सम्मान में चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का मात्रक ऑर्स्टेड रखा गया ।

⦁ दिक्यूचक सूई- यह एक छोटी छड़ चुंबक के समान होती है । यह एक ऐसी युक्ति होती है जो दिशा का ज्ञान कराती है । चुंबकीय दिक्सूचक उत्तरी ध्रुव दिशा की ओर संकेत करता है । यह यंत्र क्षैतिज दिशा का ज्ञान करवाता है ।
“समान ध्रुवों में परस्पर प्रतिकर्षण और असमान ध्रुवों में परस्पर आकर्षण होता है” ,यह चुंबकीय दिक्सूचक का सिद्धांत है ।
⦁ दिक्सूचक सूई का विक्षेपित होना –
यह एक छोटी छड़ चुंबक के समान होती है । जब इसे धातु के तार में प्रवाहित विद्युत धारा के समीप लाते है तो विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव के कारण दिक्सूचक सूई पर एक बलयुग्म कार्य करता है , जिसके कारण दिक्सूचक सूई में विक्षेप उत्पन्न होता है ।

⦁ चुंबक-

वह पदार्थ या वस्तु जो चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करे और अन्य चुंबक या चुंबकीय पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित या प्रतिकर्षित करे ,उसे चुंबक कहते है ।
चुंबक के दो ध्रुव होते है –
1. उत्तर दिशा की ओर संकेत करने वाले ध्रुव को उत्तरोमुखी ध्रुव अथवा उत्तर ध्रुव (N) कहते है ।
2. दक्षिण दिशा की ओर संकेत करने वाले ध्रुव को दक्षिणोमुखी ध्रुव अथवा दक्षिण ध्रुव (S) कहते है ।
⦁ चुंबकीय क्षेत्र- किसी चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसके बल का संसूचन किया जाता है, उस चुंबक का चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है ।
⦁ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का निरूपण-

ड्रॉइंग बोर्ड पर एक सफेद कागज लगाते है । इसके बीचोंबीच एक छड़ चुंबक को रखते है । अब लौह चूर्ण को चुंबक के चारों ओर समान रूप से छितरावक की सहायता से छितराते (बिखराते) हैं तो हम देखते हैं कि लौह चूर्ण स्वयं चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के अनुदिश संरेखित हो जाताहै ,इसे ही चुंबकीय चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं निरूपण कहते है ।
⦁ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण या विशेषताएं या गुणधर्म-

1. चुंबक के बाहर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर होती है ।
2. चुंबक के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है ।
3. ये सदैव बंद वक्र बनाती है अर्थात् ये वक्राकार होती है ।
4. ये परस्पर एक दूसरे को कभी नहीं काटती है ।
5. जहाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं अपेक्षाकृत अधिक निकट होती है ,वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है ।
6. जहाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं अपेक्षाकृत दूर-दूर होती है ,वहाँ चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल होता है ।
⦁ दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम-
जब दक्षिण-हस्त का अंगुठा विद्युत धारा की दिशा में होता है तो अंगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा में लिपट जाती है ,इसे ही दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम कहते है ।

इस प्रकार हम दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम की सहायता से किसी धारावाही चालक में उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा ज्ञात कर सकते है ।
⦁ किसी विद्युत धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र- किसी धारावाही चालक में चुंबकीय क्षेत्र की दिशा या पैटर्न को ज्ञात किया जा सकता है । इसे हम निम्न क्रियाकलापों (प्रयोगों) की सहायता से समझ सकते है –
1. सीधे चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण चुंबकीय क्षेत्र-

किसी सीधे धारावाही चालक तार के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र संकेंद्र वृतों के रूप में होता है । जब चालक तार समीप वाले संकेंद्र वृत के किसी बिन्दू P पर दिक्सूचक को रखते है तो दिक्सूचक अधिक विक्षेप उत्पन्न करता है लेकिन जब दिक्सूचक को अधिक दूरी पर स्थित संकेंद्र वृत के किसी बिन्दू Q पर रखते है तो दिक्सूचक का विक्षेप घट जाता है । अतः हम कह सकते है कि चालक तार के समीप उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है व दूर जाने पर घटता जाता है क्योंकि चालक तार के समीप संकेंद्र वृत छोटे व पास-पास होते है जबकि दूर स्थित संकेंद्र वृत साइज में बड़े व दूर-दूर होते है ।
2. विद्युत धारवाही वृताकार पाश के कारण चुंबकीय क्षेत्र –

दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम की सहायता से यदि दाहिने हाथ की अंगुलियाँ तार के ऊपर इस प्रकार लपेटी जाएँ कि अंगुठा तार में प्रवाहित धारा की दिशा में हो , तब अंगुलियों के मुड़ने की दिशा चुंबकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करेगी ।
अतः वृताकार पाश के अन्दर चुंबकीय क्षेत्र मेज के तल के लम्बवत् तथा उर्ध्वाधरतः नीचे की दिशा में है जबकी पाश के बाहर चुंबकीय क्षेत्र मेज के लम्बवत् तथा उर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर क्रियाशील होगा ।
3. परिनालिका में प्रवाहित विद्युत धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र –

पास-पास लिपटे विद्युतरोधी ताँबे के तार की बेलन की आकृति की अनेक फेरों वाली कुंडली को परिनालिका कहते है ।
किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न चित्र में दर्शाए गए पैटर्न के समान होता है । यह पैटर्न छड़ चुंबक के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के पैटर्न के समान होता है ।
परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ समांतर सरल रेखाओं की भाँती होती है । यह निर्दिष्ट करता है कि किसी परिनालिका के भीतर सभी बिन्दूओं पर चुंबकीय क्षेत्र समान होता है अर्थात् परिनालिका के भीतर एकसमान चुंबकीय क्षेत्र होता है ।

 विद्युत चुंबक –

परिनालिका के भीतर उत्पन्न प्रबल चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग किसी चुंबकीय पदार्थ जैसे नर्म लोहे को परिनालिका के भीतर रखकर चुंबक बनाने में किया जा सकता है । इस प्रकार बने चुंबक को विद्युत चुंबक कहते है ।

⦁ चुंबकीय क्षेत्र में किसी विद्युत धारावाही चालक पर चुंबकीय बल-

चुंबकीय क्षेत्र में किसी विद्युत धारावाही चालक पर लगने वाले चुंबकीय बल को फ्लेमिंग के वामहस्त (बायाँ हाथ ) नियम की सहायता से ज्ञात कर सकते है ।

इस नियम के अनुसार –
1. बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा व अंगुठे को इस प्रकार फेलाते हैं कि तीनों परस्पर लंबवत रहे ।
2. अंगुठा चुंबकीय बल को , तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र व मध्यमा विद्युत धारा की दिशा को दर्शाते है ।
इस ही वाम हस्त का नियम कहते है ।

⦁ फ्लेमिंग का दक्षिण हस्त नियम –

इस नियम के अनुसार-
1.दाएँ हाथ तर्जनी, मध्यमा व अंगुठे को इस प्रकार फेलाते हैं कि तीनों परस्पर लंबवत रहे ।
2. तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र को , मध्यमा चालक में प्रेरित विद्युत धारा तथा अंगुठा चालक की गति की दिशा को दर्शाते है ।

⦁ गैल्वेनोमीटर-

यह एक ऐसा उपकरण है जो किसी परिपथ में विद्युत धारा की उपस्थिति को संसूचित करता है ।

⦁ विद्युत मोटर-

विद्युत मोटर एक ऐसी युक्ति होती है जिसमें विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है ।
विद्युत मोटर का उपयोग विद्युत पंखों ,रेफ्रिजरेटरों, विद्युत मिश्रकों ,वॉशिंग मशीन, कंप्यूटरों तथा MP-3 प्लेयरों आदि में किया जाता है ।

विद्युत मोटर की कार्य प्रणाली –

विद्युत मोटर में विद्युतरोधी पदार्थ की एक आयताकार कुंडली होती है,जो चुंबकीय क्षेत्र के दो ध्रुवों के मध्य इस प्रकार व्यवस्थित होती है कि इसकी AB व CD भुजाऐं चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रहे । कुंडली के दोनों सिरे विभक्त वलयों के दो अर्धभागों P व Q से संयोजित होते है । इन अर्धभागों की भीतरी सतह विद्युतरोधी होती है तथा धुरी से जुड़ी होती है । P तथा Q क्रमशः स्थिर चालक ब्रशों X व Y से संपर्कित रहते है । दोनों चालक ब्रश X व Y विद्युत स्रोत( विद्युत बैट्री) से जुड़े होते है ।
जब धारा प्रवाहित होती है तो यह X से होते हुए भुजा AB में पहुँचती है ,तो इस भुजा पर नीचे की ओर बल आरोपित होता है । आरोपित बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम की सहायता से ज्ञात करते है । जब धारा भुजा CD में आती है तो धारा की दिशा बदल जाती है जिससे लगने वाले बल की दिशा परिवर्तित होकर ऊपर की ओर हो जाती है ।
इस प्रकार किसी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतंत्र कुंडली तथा धुरी वामावर्त घूर्णन करते है । आधे घूर्णन में Q का संपर्क ब्रश X से तथा P का संपर्क ब्रश Y से हो जाता है । अतः कुंडली में विद्युत धारा उत्क्रमित होकर पथ DCBA के अनुदिश प्रवाहित होती है जिससे AB व CD भुजाओं पर लगने वाले बलों की दिशा भी उत्क्रमित हो जाती है । अतः कुंडली तथा धुरी उसी दिशा में अब आधा घूर्णन और पूरा कर लेती है । प्रत्येक आधे घूर्णन के पश्चात विद्युत धारा के उत्क्रमित होने का क्रम बार-बार चलता रहता है । जिसके फलस्वरूप कुंडली तथा धुरी का निरंतर घूर्णन होता रहता है ।

⦁ व्यवसायिक विद्युत मोटरों में निम्न परिवर्तन किये जाते है –

1. स्थायी चुंबकों के स्थान पर विद्युत चुंबक प्रयोग किये जाते है ।
2. विद्युत धारावाही कुंडली में फेरों की संख्या अधिक होती है ।
3. कुंडली नर्म लोहे क्रोड पर लपेटी जाती है ।

⦁ दिक् परिवर्तक –

वह युक्ति जो परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह को उत्क्रमित कर देती है , उसे दिक् परिवर्तक कहते है । जैसे विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक् परिवर्तक का कार्य करते है ।

⦁ आर्मेचर-

नर्म लौह क्रोड व उस पर लपेटी गई कुंडली दोनों मिलकर आर्मेचर कहलाते है ।

⦁ प्रत्यावर्ती धारा –

ऐसी विद्युत धारा जो समान काल -अंतरालों के पश्चात अपनी दिशा में परिवर्तन कर लेती है ,उसे प्रत्यावर्ती धारा (ac) कहते है । जो युक्ति इस धारा को उत्पन्न करती है उसे ac जनित्र कहते है ।

⦁ दिष्ट धारा –

ऐसी विद्युत धारा जो समय के साथ अपनी दिशा परिवर्तित नहीं करती है ,उसे दिष्ट धारा (dc) कहते है । जो युक्ति इस धारा को उत्पन्न करती है उसे dc जनित्र कहते है ।

.विद्युत जनित्र- विद्युत जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग चुंबकीय क्षेत्र में रखे किसी चालक को घूर्णी गति प्रदान करने में किया जाता है , जिसके फलस्वरूप विद्युत धारा उत्पन्न होती है । इसे विद्युत जनित्र का सिद्धांत कहते है ।
विद्युत जनित्र की कार्य प्रणाली –

चित्रानुसार विद्युत जनित्र में एक आयताकार कुंडली ABCD होती है, जिसे स्थायी चुंबक के दो ध्रुवों के बीच रखा जाता है । इस कुंडली के दोनों सिरे वलय R1 व R2 से संयोजित होते है । दोनों वलय धुरी के साथ संयोजित होती है । वलय R1 व R2 क्रमशः दो स्थिर चालक ब्रशों B1 व B2 से संपर्कित रहती है और दोनों ब्रशों को गैल्वेनोमीटर से संपर्कित कर दिया जाता है ।
जब धुरी को बाहरी यांत्रिक कार्य की सहायता से घुमाया जाता है तो कुंडली की AB भुजा ऊपर की ओर के व CD भुजा नीचे की ओर के चुंबकीय क्षेत्र को काटती हुई गति करती है । फ्लेमिंग के दक्षिण- हस्त नियम की सहायता से दोनों भुजाओं में धारा की दिशा ज्ञात की जा सकती है । अतः धारा ABCD दिशा में प्रवाहित होगी ।
अर्धघूर्णन के पश्चात AB भुजा नीचे की ओर तथा CD भुजा ऊपर की ओर गति करेगी, जिससे कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा की दिशा परिवर्तित होकर DCBA के अनुदिश हो जाती है ।
अतः इस प्रकार प्रत्येक आधे घूर्णन के पश्चात विद्युत धारा की दिशा क्रमिक(लगातार) बदलती रहती है । और यह धारा गैल्वेनोमीटर में विक्षेप उत्पन्न करती है ।
यदि कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ा दी जाए है तो शक्तिशाली विद्युत धारा उत्पन्न की जा सकती है ।
ऐसी विद्युत धारा जो अपनी दिशा समय के साथ परिवर्तन कर लेती है ,उसे प्रत्यावर्ती धारा (ac) कहते है । जो युक्ति इस धारा को उत्पन्न करती है उसे प्रत्यावर्ती जनित्र( ac जनित्र) कहते है ।

⦁ वैद्युत चुंबकीय प्रेरण- वह प्रक्रम जिसके द्वारा किसी चालक के परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र के कारण अन्य चालक में विद्युत धारा प्रेरित होती है , उसे वैद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते है ।

अथवा

⦁ घरेलु विद्युत परिपथ –
हम अपने घरों में विद्युत ऊर्जा की आपूर्ति मुख्य तारों (जिसे मेंस भी कहते है ।) से प्राप्त करते है । घरों में विद्युत ऊर्जा आपूर्ति के इस परिपथ को ही घरेलु विद्युत परिपथ कहते है ।

घरेलु विद्युत परिपथ में तीन प्रकार के तार काम आते है –
1. विद्युतन्मय तार (धनात्मक तार)- इस तार पर लाल रंग का विद्युतरोधी आवरण होता है ।
2. उदासीन तार(ऋणात्मक तार) – इस तार पर काले रंग का विद्युतरोधी आवरण होता है ।
3. भूसंपर्कित तार – इस तार पर हरे रंग का विद्युतरोधी आवरण होता है । इस तार को घर के निकट भूमि के भीतर बहुत गहराई पर स्थित धातु की प्लेट से संयोजित करते है । इस तार का उपयोग विशेषकर विद्युत इस्त्री ,टोस्टर, मेज पंखा ,रेफ्रिजरेटर आदि की सुरक्षा के उपाय के रूप में किया जाता है ।